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ऐसा वक्त था एक दिन किसान तेरै पै / मुनीश्वर देव

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ऐसा वक्त था एक दिन किसान तेरै पै
थे राहू बण कर चढ़े हुए धनवान तेरै पै

सारी फसल कमाई लाला ठाकै ले जा था
बैल भैंस करजे म्हं तेरै लाकै ले जै था
एक कच्चा कोठा टूटी बचै थी छान तेरै पै

सारी कमाई जा ले थी ना सूद पाटै था
ठेठ गरीबी के मैं सारी उमर काटै था
वां राज करें थे लुटेरे शैतान तेरै पै

था शेर बणग्या स्यार बट्टा लग ग्या लाज म्हं
जमीन गिरवी धर ली तेरी सब ब्याज ब्याज म्हं
सरकार नै भी दिया नहीं कभी ध्यान तेरै पै

चौधरी सर छोटू राम नै तेरी लड़ी लड़ाई थी
बणवा कर कानून कर्ज जमीन छुड़वाई थी
वां जिंदगी भर नहीं उतरेंगें अहसान तेरै पै

आज फिर किसान पगड़ी संभाळ् खतरे म्हं
जमीन सारी बैकों म्हं दी डाल खतरे म्हं
बाकी बची मरोड़ “मुनीश्वर” श्रीमान तेरै पै