भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ऐसे इंक़लाब अक्सर राएगां ही जाते हैं / मेला राम 'वफ़ा'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ऐसे इंक़लाब अक्सर राएगां ही जाते हैं
जो निज़ामे-आलम में किस्तवार आते हैं

बद उसूल, बद बातन, बद चलन दुश्मन
जब भी दनदनाते थे अब भी दनदनाते हैं

खून देने वालों को पूछता नहीं कोई
दूध पीने वाले अब मर्तबे भी पाते हैं

दुश्मनों से सहवन भी जो कभी न खाते हम
दोस्तों से दानिश्ता वो फ़रेब खाते हैं।