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ऐ देश सारे म्हं पड़री किलकी इब कै हाथी आवैगा / अमर सिंह छाछिया

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ऐ देश सारे म्हं पड़री किलकी इब कै हाथी आवैगा।
ऐ गिरद गुमार उठ री धूल यो सफाया बणावैगा।...टेक

ऐ जब यो चालै सब कुछ हालै जी मेरा घबरा जागा।
ऐ बणके ईख दे दिये पोरी यो लालच म्हं आ जागा।
ऐ मेरा गोला भी छोड़ै कोनी यो साबत नै खा जागा।
ऐ तेरी गंडीरी सै मिठी इसकै भी जी सा आ जागा।
ऐ थर-थर कांपै गात मेरा सूंड मेरै लावैगा...।

ऐ कदे देखण म्हं ना आया इतना हो जोश देश म्हं।
ऐ बी.एस.पी. के गावै गीत ये बोलै सारे टेक म्हं।
ऐ बी.जे.पी. के हांसै सै तैं भी आवै इसकी फेट म्हं।
ऐ दोनों मिलके चलांगे देखां झोपड़ी खेत म्हं।
ऐ जेली लेई खड़ा रुखाला वो इनै का पावैगा...।

ऐ किते जाके देख लिये जोर बी.एस.पी. का पावैगा।
ऐ फिरगी लहर ना उसकी खैर जो टक्कर म्हं आवैगा।
ऐ जब्त जमानत ए हो उसकी यो खड़ा लखावैगा।
ऐ उसके मरज इसी ए बैठगी वो गोली ऐ खावैगा।

ऐ बेहोशी का लागै सुआ वो पड़ा खाट म्हं पावैगा...।
ऐ अमरसिंह यो बड़सी का नारा भीम का लावैगा।
ऐ कच्चा कोन्या छोडै यो पक्का काम बणावैगा।
ऐ हरियाणा म्हं नरेश सारन यो जीत जावैगा।
ऐ मायावती का बहुमत इबकै फुल आवैगा।
ऐ प्रधानमन्त्री इबकै कुर्सी छोड़ जावैगा...।