भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ओळूं आवै हर घडी सांस जाणै / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ओळूं आवै हर घडी सांस जाणै
लागै जादू री छडी सांस जाणै

आभै में भोर रो सिंदूरी उजास
सोळवैं पगोथियै खडी सांस जाणै

ठूंठ दांई खड़्‌यो एकलो तो ई
किण खातर म्हारी अड़ी सांस जाणै

ना हवा है ना उजास आं कमरां में
फालतू चीज-सी पड़ी सांस जाणै

राजघाट चौफेर एक ई लखाव
सांस खातर कदै लड़ी सांस जाणै