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और कसर रहरी हो तै दो जूत मार ले सिर मैं / मेहर सिंह

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वार्ता- सज्जनों तमाम सफाई पेश करने के बावजूद भी चापसिंह सोमवती की बातों का विश्वास नहीं करता और क्या कहता है-

नास करण नै आण्य बड़ी म्हारे रजपूतां के घर मैं
और कसर रहरी हो तै दो जूत मार ले सिर मैं।टेक

बात समझ कै करणी चाहिए बातां पै मरणा सै
सच्चे दिल तैं भजन करें जा जै भव सागर तिरणा सै
होणा था जो हुंऊया जगत में जी कै के करणा सै
भीक्षक बणकै प्राण पति के दरबारां में फिरणा सै
इस जिन्दगी में नहीं मिलूंगा बांध चल्या बिस्तर मै।

तूं तो कहे थी पतिवरता सूं के योहे मूंह सै तेरा
वैश्या का घर बणा दिया तनै रजपूता का डेरा
उठ मुसाफिर चाल्य पड़े बस हो लिया रैन बसेरा
बोलण तक की सरधा कोन्या घा दुखै सै मेरा
शेरखान नै दरबारां में गाडे सेल जिग मैं।

पहले दिन तै पता हनीं था जो तेरे गुप्त बिमारी
बेईमान डूबकै मरजा थुकै दुनियां सारी
अपणी कह दी तेरी सुण ली ईब लिए नमस्ते म्हारी
खुल्ले मुखैरे फिर्या करेगी शेरखान की प्यारी
मैं फांसी के तख्ते पै चढ़ग्या बैरण तेरे फिकर मैं।

धरम करम नैं छोड़ पाप की बेल फैलाणे आळी
मुसलमान नै रजपूतां की सेज सुलाणे आळी
दो दिन का जीणा दुनियां में या जिन्दगी जाणे आळी
कहै मेहरसिंह मिलै नतीजा ईश्क कमाणे आळी
धर्म कर्म नै छोड़ फंसी इस काम देव चक्कर मैं।