भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

और खिल उठेंगे / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कितना अच्छा है
कोई परवाह नहीं कीचड़ में सन जाने की

पानी से हुआ कीचड़
पानी से घुल जाएगा
जानते है
पानी में पानी के संग फिसलते बच्चे

पानी में खिल उठते हैं बच्चे
धुलकर खिल गया है जैसे नीला-नीला आकाश
धुलकर खिल उठा है जैसे पेड़ के हरे-हरे पात

धुलकर और खिल उठेंगे
बच्चों के धुले-धुलाए मन !