भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

और सिकुड़नी होगीं आँखें / स्वाति मेलकानी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पानी के फर्श पर
नहीं है
निशान पैरों के
जिन पर चलकर
कदम बढ़ेंगे।
और सिकुड़नी होगीं आँखें
दिमाग को और खुलना होगा
खिंचना होगा पेशियों को
गिरनी होंगी
पसीने की कई बूँदें।
खुद ही आगे
मध्य
अंत तक
ताना-बाना बुनना होगा।
सबको लेकर चलना होगा।
सबकुछ खोकर चलना होगा
और अकेले भिड़ना होगा
अपने इस
एकाकी मन से