भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

औ आदमी म्हनै रो अखबार लखावै / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

औ आदमी म्हनै रो अखबार लखावै
दो घड़ी नुंवो पछै बेकार लखावै

रीसां बळती लाधी भोर-सिंझ्या म्हनै
दोनां बिच्चै हुई आज तकरार लखावै

सोध-सोध हार्‌या पण लाध्यो कोनी
औ सुख छोरो जुगां सूं फरार लखावै

भींतां कानी देख डुसका भरै टाबर
ऐ घर-आंगणा आज बीमार लखावै

कुण जाणै किण घड़ी आ जावै तगादो
आ सांस लियोड़ी म्हनै उधार लखावै