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कविता कोश सूत्र 2017, बांका, बिहार

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अंगिका कविता कोश सूत्र: पहला वार्षिक महा-अधिवेशन

26 फ़रवरी 2017 को बांका (बिहार) के चंगेरी मिर्ज़ापुर हाई स्कूल में कविता कोश के अंगिका विभाग के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें 80 से अधिक अंगिका साहित्यकारों सहित करीब 200 लोगों ने भाग लिया। इस पूरे कार्यक्रम को आयोजित करने का श्रेय कविता कोश में अंगिका की सहायक-संपादक टीम, डॉ. अमरेन्द्र और राहुल शिवाय, को जाता है। आज का जन्मदिन भी है... हमारे इस युवा स्वयंसेवक को हार्दिक शुभकामनाएँ!

बांका में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शिवनारायण जी ने जी और इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री रामयतन यादव थे।

इस महा-अधिवेशन में अंगिका के पाँच युवा रचनाकारों को "अंगिका कोंपल" की मानद उपाधि दी गई। ये पाँच रचनाकार हैं: सर्वश्री माधवी चौधरी, सुजाता कुमारी, अनिमेष कुमार, कुमार सम्भव और महादेव ठाकुर।

सर्वश्री दिनेश बाबा, कस्तूरी झा 'कोकिल', सुधीर कुमार 'प्रोग्रामर' और प्रदीप प्रभात को "अंगिका विभूति" की मानद उपाधि दी गई।

सम्मानों की शृंखला के अंत में वरिष्ठ साहित्यकार श्री अनिरुद्ध प्रसाद विमल को "अंगिका साहित्य रत्न" सम्मान प्रदान किया गया।

इसके बाद राहुल शिवाय ने कविता कोश के संस्थापक ललित कुमार द्वारा अंग प्रदेश के नाम लिखे एक पत्र को पढ़कर सुनाया और कविता कोश के अंगिका विभाग की अभी तक की यात्रा के संस्मरण सुनाए।

श्री सुधीर कुमार प्रोगरामर ने अंगिका कविता कोश के सम्पादक मंडल में डॉ. अमरेन्द्र और राहुल शिवाय के महत्त्व के बारे में अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन करते राहुल शिवाय

अन्य चित्र फ़ेसबुक पर

सुश्री माधवी चौधरी ने अपने वक्तव्य में अंगिका भाषा के वैश्विक विस्तार के बारे में चर्चा की।

सुश्री सुजाता कुमारी ने भागलपुर और श्री प्रदीप प्रभात ने झारखंड में अंगिका भाषा के लिए किए गए कार्यों का ब्यौरा श्रोताओं को दिया।

इसके बाद अंगिका भाषा के कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ -- जो करीब चार घंटे चला और श्रोता लगातार बैठे रचनाएँ सुनते रहे।

मुझे बेहद ख़ुशी है कि राहुल शिवाय और डॉ. अमरेन्द्र की टीम ने कविता कोश सूत्र शृंखला के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम को बखूबी आयोजित किया। यहाँ मैं स्पष्ट करना चाहूँगा कि इस आयोजन में मेरी ओर से कोई सहायता नहीं दी गई थी। इसलिए इस आयोजन का पूरा श्रेय राहुल शिवाय और डॉ. अमरेन्द्र को ही जाता है। यह देखकर मुझे बहुत बहुत अच्छा लगता है कि कविता कोश के स्वयंसेवक अब अपने बलबूते नए-नए कार्य कर कोश के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

जय स्वयंसेवा!

--ललित कुमार की फ़ेसबुक पोस्ट