भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

कविता सुनाई पानी ने-1 / नंदकिशोर आचार्य

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक कविता सुनाई
पानी ने चुपके से धरती को

सूरज ने सुन लिया उसको
हो गया दृश्य उसका

हवा भी कहाँ कम थी
ख़ुशबू हो गई छूकर

लय हो गया आकाश
गा कर उसे

एक मैं ही नहीं दे पाया
उसे ख़ुद को
नहीं हो पाया
अपना आप ।