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कवि के बीबी होके हम पछतावऽ हो / सिलसिला / रणजीत दुधु

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सपना में ही अपन सउख मेटावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

हमरा से जादे कविता भावे हे
रिस्तेदार में साहितकार आवे हे
गीत में ही हम अपन बर्णन पावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

उनकर एक-एक करनी से हम ही उब्बल
कल्पना लोक में हरपल रहऽ हथ डुब्बल
मुँह कर-कर के उनका हमें खिलावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

कल्पने में उ हलुआ पुरी छानऽ हथ
कुछ माँगे पर ओकर गुण बखानऽ हथ
गीते में सउँसे दुनियाँ घुम आव ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

कहऽ हथ जिनगी कविते के बदउलत हे
कविते हमर सबसे बड़का दउलत हे
छंद में अपन मन के भाव देखावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

अपन चिंता छोड़ दुनियाँ ले सोंचऽ हथ
दोसर के करनी पर माथा नोचऽ हथ
सउँसे घर के बोझ माथा उठावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

हमरा पाला पड़ल ऐसन मरदाना के
मुँह देखवे लायक न´ ही जमाना के
अपन मन व्यथा हम अपने गावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

दुनियाँ के सेवा करना ही निष्ठा हे
धन के नाम पर कहऽ हका प्रतिष्ठा हे
अखबार में नाम आउ फोटो पावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

न´ जानुँ कखने सुतऽ कखने जागऽ हथ
व्यंग्य वाण के शब्द हमेशा दागऽ हथ
हम तो सपने में ही सेज सजावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

किताब अंगवस्त्र भरल अलमारी हे
हम्मर पेटी में न´ एकोगो साड़ी हे
हे निनान कछनी काट दिन बितावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।

झाँपल बात कह बिगड़लका हम्मर छवि
सब उनका पर हँसे बनला हास्य कवि
उ बेशर्मी बनला हम तो शरमावऽ ही
कवि के बीबी होके हम पछतावऽ ही।