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कहाँ जाऊँ / जय गोस्वामी / रामशंकर द्विवेदी

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तीन दिन पहले ही तो
तुम आई थी ।

सोच रहा हूँ,
जैसे कितना समय हो गया है
तुम्हें आए ?

ऐसा पागलपन लिए
इस उम्र में
बोलो, कहाँ जाऊँ ?

मूल बाँगला भाषा से अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी