भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कहानी की तकमील / सफ़दर इमाम क़ादरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दाएँ पहाड़ पर मिट्टी है
बाएँ ऊँचे-ऊँचे पेड़
आगे गहरी खाई
आँखें जब ऊपर करता हूँ
बादल झुक कर पर्वत पर
अपने नाज़ुक होंठों से
लम्स[1] का नज़राना[2] टपकाते हैं
एक कहानी पूरी हो जाती है

शब्दार्थ
  1. स्पर्श
  2. दान-दक्षिणा