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कान्हा तोरोॅ बँशिया मन केॅ लुभाय हो / नवीन चंद्र शुक्ल 'पुष्प'

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कान्हा तोरोॅ बँशिया मन केॅ लुभाय हो
सूनी केॅ घरोॅ में रहलोॅ नै जाय हो

मन तेॅ करै छै रहौ सुनथैं बाँसुरिया
देखयैं रहौं तोरोॅ मोहिनी सुरतिया
आवोॅ बाँसुरिया देॅ कान्हा सूनाय हो

तोर्है लग बैठलॉे रहौं आठोॅ पहर रे
साथे साथ घूमौं कान्हा यमुना किनार रे
दिन केॅ बितैलेॅ तेॅ बितैलो नै जाय हो

सुतला में देखतेॅ रहौं तोरे सपनमा
जागला में देखौं कान्हा आपनोॅ ऐंगनमा
मनोॅ के बात तेॅ कैहलोॅ नै जाय हो

दहीवाला चूड़ीवाला बनी केॅ आवोॅ
वैदा बनी केॅ कान्हा दरद है मिटावोॅ
आधी केॅ कान्हा देॅ जिय केॅ जुड़ाय हो