भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

काला शाह काला / पंजाबी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

काला शाह काला, मेरा काला ई सरदार
गोरेआं नु दफा करो, मैं आप तिल्ले दी तार
काला शाह काला...

सस्ड़ीए तेरे पंज पुत्तर, दो ऐबी दो शराबी
जेहड़ा मेरे हाण दा ओ खिड़आ फुल्ल गुलाबी
काला शाह काला...

सस्ड़ीए तेरे पंज पुत्तर, दो टीन दो कनस्तर
जेहड़ा मेरे हाण दा ओ चला गया ए दफ्तर
काला शाह काला...

मेरा पति काले रंग का है.
गोरे रंग वाले लोगों को भगा दो(गोरे रंग वालों की ज़रुरत नहीं है). मैं खुद ही सोने की तार जैसे हूँ.

सास तेरे पांच बेटे हैं. दो बुरे हैं और दो शराबी हैं
(लेकिन) जो मेरा पति है वो खिले हुए गुलाब जैसा है

सास तेरे पांच बेटे हैं. दो टीन हैं दो कनस्तर हैं(निक्कमे हैं)
(लेकिन) जो मेरा पति है वो दफ्तर चला गया है