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किसी से मेरी प्रीत लगी अब क्‍या करूँ / गोपाल सिंह नेपाली

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किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूँ...
अब क्या करूँ... रे अब क्या करूँ...
किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूँ......
पास-पड़ोस मे
पास-पड़ोस मे बाजा बजे रे
दूल्हा के संग नयी दुल्हन सजे रे
मै तो बड़ी-बड़ी
मै बड़ी-बड़ी आंखो वाली देखा करूँ...
किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूँ...
अब क्या करूँ... रे अब क्या करूँ...
किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूँ...
सोलह बरस की मै तो
खुशबु हू कास की मै तो
बाकी मतवाली मै तो
प्याली हू देसी की
चढ़ाती उम्र नही बात मेरे बस की
जवानी मेरे बस की
नही जी मेरे बस की
हाय मोरे रामा
अकेली यहा पड़ी-पड़ी आहे भरू
किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूँ...
अब क्या करूँ... रे अब क्या करूँ...
किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूँ...
अब न रुकूँगी किसी के रोके
पीहर चलूगी मै पिया की हो के
डोलिया हिलेडोले
डोलिया हिलेडोले मै तो बैठी रहू
किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूं
अब क्या करूँ... रे अब क्या करूँ...
किसी से मेरी प्रीत लगी अब
क्या करूँ...