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कुंवर नारायण / परिचय

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लखनऊ विश्वविद्यालय से अंगरेज़ी साहित्य में एम.ए. । आरम्भ से ही कविता के साथ-साथ चिन्तनपरक लेख, साहित्य समीक्षा,कहानियाँ भी लिखते रहे हैं । फिल्म समीक्षा तथा अन्य कलाओं पर भी उनके लेख नियमित रूप से पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहते हैं । अनेक अन्य भाषाओं के कवियों का हिन्दी में अनुवाद किया है, और उनकी स्वयं की कविताओं और कहानियों के कई अनुवाद विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं और कहानियों के कई भाषाओं में छपे हैं । ‘आत्मजयी’ का 1989 में इतालवी अनुवाद रोम से प्रकाशित हुआ । ‘युगचेतना’ ‘नया प्रतीक’ तथा ‘छायानट’ के संपादक-मण्डल में रहे हैं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रह चुके हैं ।

1971 में हिन्दुस्तानी अकादमी पुरस्कार, 1973 में प्रेमचंद पुरस्कार,1982 में मध्य प्रदेश के तुलसी पुरस्कार और केरल के कुमारन् पुरस्कार तथा 1988 में हिन्दी साहित्य में विशेष योगदान के लिए हिन्दी संस्थान (उ.प्र.) द्वारा सम्मानित । उनकी प्रमुख प्रकाशित काव्य कृतियाँ हैं- चक्रव्यूह(1956), तीसरा सप्तक(1959), परिवेश : हम-तुम(1961), आत्मजयी/ प्रबन्ध काव्य(1965), अपने सामने(1979) । आकारों के आसपास(1971) उनका चर्चित कहानी संग्रह है । उन्होंने कॉन्सटैन्टीन कवाफ़ी तथा ख़ोर्खे-लुई बोर्खेस की कविताओं के अनुवाद(1986,1987) किया है ।