भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कुछ कीजिए / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हुआ बेघर, कुछ कीजिए ।

भटकता है दर–बदर, कुछ कीजिए ।

फ़रेब के सैलाब से न बच सके

परेशान है रहबर, कुछ कीजिए ।

रहनुमा बनकर जो कल गले मिले।

वे लिये आज ख़ज़र, कुछ कीजिए ।

बेहया हो गया मौसम बहार का ।

मुश्किल है बहुत सफ़र, कुछ कीजिए ।

ख़ुदा! तू भी परेशान ही होगा

तेरा ख़ौफ़ बेअसर, कुछ कीजिए ।