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कुछ जतन करै नै मेरी नार हुयआ बेहोस घघेळा छावै सै / मेहर सिंह

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वार्ता- जब सत्यवान लकड़ी काट रहा था तो उसकी तबीयत कुछ खराब सी होती है। नारद जी की बात झूठी नहीं थी सावित्री इस बात को जानती थी। सत्यवान को इस बात का पता नहीं था। यम के दूतों ने सत्यवान को दरखत पर ही घेर लिया। तो सत्यवान कहता है

कुछ जतन करै नै मेरी नार हुयआ बेहोंस घंघेळा छावै सै।

रहया ना गात आज मेरे बस मैं
किसनै जहर मिला दिया रस मैं
इसमैं लिए दवाई डार, सूकता कचियां केळा आवै सै।

कुछ तै जिन्दगी का फळ ले
बखत आणे पै ठीक संभळ ले
तूं मिल ले भुजा पसार, यो मेळा बिछड़या जावै सै।

सून्नी हो रही नार धणी बिन
जैसे सून्ना शेर बणी बिन
मणी बिन सर्प मरै सिर मार जीणा नहीं सपेला चाहवै सै

तेरी करणी में पड़ग्या भंग
कट्ये जिन्दगी के ऐस उमंग
मेहर सिंह कर भजन उतरज्या पार, गया बखत कित ध्यावै सै।