भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

केरबा जे फड़ल छै घौदसँ / मैथिली लोकगीत

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैथिली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

केरबा जे फड़ल छै घौदसँ
ओइ पर सूगा मड़राय
मारबौ रे सुगबा धनुखस
सूगा खसय मुरुझाय
सुगनी जे कानय विरोगसँ
आदित होउ ने सहाय
नेमुआँ जे फड़ल छै घौदसँ
ओइ पर सूगा मड़राय
मारबौ रे सुगबा धनुखसँ
सूगा खसय मुरुझाय
सुगनी जे कानय विरोगसँ
आदित होउ न ेसहाय
काँचहि बाँस केर बँहिगा
ओइ मे रेशमक डोर
भरिया से फल्लाँ भरिया
भार नेने जाइ छै
बाटहि पुछै बटोहिया
ई भार किनकर जाइ
आन्हर छही रे बटोहिया
ई भार छठि माइ के जाइ
ई भार दीनानाथ के जाइ