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कै भड़ को आइ होलो, यो दल-बल

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

कै भड़[1] को आइ होलो, यो दल-बल,
कै भड़ की आई होली, या पिंगली पालंकी,
केक सेन्दो बाबा जी, निंद सुनिंद,
ऐ गैन बाबा जी, जनती[2] का लोक,
नी सेन्दू बेटी मैं, निन्द सुनिंद।
तेरी जनीत कांद ओगी लौलू!
बरमा जी करला, गणेश की पूजा,
वर तैं लगौलू मंगल पिठाई।

शब्दार्थ
  1. वीर
  2. बारात