भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कोई नहीं जानता / लीलाधर जगूड़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कोई नहीं जानता कि वह क्‍या नहीं जानता है
घोड़े नहीं जानते उनसे हजारों वर्ष
इंजिन का काम लिया गया
बैल नहीं जानते उनसे हजारों वर्ष
ट्रैक्‍टर का काम लिया गया

इंजिन और ट्रैक्‍टर पहले चार पैरोंवाले होते थे
और घास खाते थे कोई नहीं जानता
अब ट्रैक्‍टर और इंजिन एक साथ रहते हैं
(जैसे गोशाला में साँड़ और घोड़ा)
कब हम क्‍या-क्‍या जान लेंगे कोई नहीं जानता
कोई नहीं जानता वह क्‍या नहीं जानता है

यहाँ जितने भी जानकार हैं
वे सब न जानने के माहिर हैं
भविष्‍य बताता है वे क्‍या नहीं जानते थे

जो बात घोड़े और बैल नहीं जानते
वह बात इंजिन और ट्रैक्‍टर भी नहीं जानते हैं
कि उनकी शक्ति
आत्‍मा की त्‍वचा के आनंद से पैदा होती थी
शक्ति पहले एक बछेरा और एक बछड़ा होती थी

इंजिन और ट्रैक्‍टर नहीं जानते
कि शक्ति के मुँह में पहले लार बना करती थी
और किसी खास गंध से
किसी इंजिन की दुम उठ जाया करती थी

जब घोड़ा एक इंजिन था जब बैल एक ट्रैक्‍टर था
तब वे नहीं जानते थे कि आगे चलकर
कोई भी इंजिन यह नहीं जान पायेगा
कि वे जीवितों की तरह किसी दर्द से डरते थे
और किसी दर्द पे मरते थे
वे नहीं जानते थे कि लार और दुम का संबंध
करंट और स्विच में बदल जायेगा

कब हम क्‍या-क्‍या जान लेंगे कोई नहीं जानता
कोई नहीं जानता कब हम क्‍या-क्‍या भूल जायेंगे।