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कोई बाड़ नहीं / सांवर दइया

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नहीं
अब मैं कोई ‘बाड़’ नहीं बांधूगां
अपने इस खेत के चौफेर

खुला छोड़ दूंगा यह खेत
फिर
होगा तो इतना ही तो होगा
चरेंगे ढोर
उजाड़ेंगे धान
नहीं
अचानक नहीं किया है
बाड़ नहीं बांधने का फैसला

खूब सोचा
फिर-फिर सोचा
क्योंकि देखा मैंने
मेरे उस खेत पर
धावा बोला
मेरे ही खेत की बाड़ ने

बाड़
जो बांधी थी मैंने
खेत की रखवाली के लिए
अफसोस !
उसी बाड़ ने निगला
मेरा खेत !