भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कोई भटकता बादल / फ़राज़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


कोई भटकता बादल

दूर इक शहर में जब कोई भटकता बादल
मेरी जलती हुई बस्ती की तरफ़ जाएगा
कितनी हसरत[1] से उसे देखेंगी प्यासी आँखें
और वो वक़्त की मानिंद[2] गुज़र[3] जाएगा

जाने किस सोच में खो जाएगी दिल की दुनिया
जाने क्या-क्या मुझे बीता हुआ याद आएगा
और उस शह्र का बे-फैज़[4]भटकता बादल
दर्द की आग को फैला के चला जाएगा

शब्दार्थ
  1. लालसा
  2. भाँति
  3. निकल, बीत
  4. कंजूस