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कोए रहया ना सब नै जाणा दो दिन आगै और पिछै / मेहर सिंह

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जीव अमानत खुद ईश्वर की हंस कै दे मत मुट्ठी भिंचै
कोए रहया ना सब नै जाणा दो दिन आगै और पिछै।टेक

इसे इसे भी नहीं रहै जगत में दुनिया का रासा सुण कै
जीव पिंजरा बन्द भौरे मैं रावण का बासा सुण कै
श्री रामचन्द्र तै करी लड़ाई तकदीरी पासा सुण कै
आप मर्या और कुटम्ब खपाया तोड़ कती खासा सुण कै
गगन चढ़ी फर्राट करै थी टूट धजा गिरगी नीचै।

आए थे कुछ ठहरण खातिर करा वापसी वेट चले
टेशन पर तै टिकट कटा कै गाड़ी कै म्हां बैठ चले
कोए उत्तर नै कोए दक्षिण नै पूर्व पछम गेट चले
बड़े बड़े अमरावत तज कै ऐश अमीरी सेठ चले
बिन पहिया बिन चैन लैन मौत रेल सबनै खिंचै।

जोरा सिंह शिशपाल कंस जिनसे सभी लोग कांप्या करते
इसे इसे भी नहीं रहे जगत में जो दुजा ना थाप्या करते
हिरणाकुश से पापी होंगे जो भगत मार धाप्या करते
वो पांडो भी कित चले गये जो डंगा धरती नाप्या करते
किस किस के इतिहास सुणाऊं आंख खोल मतना मिंचै।

सतगुरु के परखे बिन तिन चेला खोटा रहै खर्या हो ना
मेहर सिंह वो गाणा किसा जिस छन्द में रस भर्या हो ना
ऐसा कोण होया जगत में जो पैदा हुया भरा हो ना
सूखा वृक्ष बाग मैं पौधा हट कै फेर हर्या हो ना
जिस कै फल लागण की आश नहीं क्यूं लाकड़ मैं पाणी सींचै।