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कौन है ज़्यादा कौन कम / जय गोस्वामी

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('मुझे लगता है इसके लिए वे (मुख्यमन्त्री) ख़ुद भी अकेले में दुखी हो रहे होंगे'- नन्दी ग्राम के सन्दर्भ में सुनील गंगोपाध्याय/ आनन्दबाज़ार पत्र्का/ 16 मार्च 2007)

पहचान लिया तो जीभ जिसकी काट दी बलात्कार के बाद
दोनों हाथों से दोनों टाँगें पकड़ चीर डाला जिसके बच्चे को
बाजू पर वार कर जिसके पति को उठा फेंका आँगन में
मर जाने तक मुँह में देने नहीं दिया अँजुरी भर पानी
उन सब महिलाओं के भीतर जल रही जो शोकाग्नि
उस आग के सामने
ले आओ, गोली का आदेश देने वाले शासक के दो घंटे का विषाद
फिर मापो और देखो कौन है ज़्यादा कौन कम
फिर सोचो और सोचो किन लोगों ने कहा था
जीवन नरक बना देंगे, ज़रूरी हुआ तो जान से मारेंगे, जान से !

यह कह मोर आज चोंच से उठाए ख़ून को
नाचे जाता शमशान-शमशान को

और उस नृत्य से हरतरफ़ छिटकता जाता सुलगता मोरछला

बांग्ला से अनुवाद : संजय भारती