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ख़ुदग़रज़ / फ़राज़

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ख़ुदग़रज़[1]

ऐ दिल! अपने दर्द के कारन तू क्या-क्या बेताब[2]रहा
दिन के हंगामों[3]में डूबा रातों को बेख़्वाब[4] रहा
लेकिन तेरे ज़ख़्म का मरहम तेरे लिए नायाब[5] रहा

फिर इक अनजानी सूरत ने तेरे दुख के गीत सुने
अपनी सुन्दरता की की किरनों से चाहत के ख़्वाब[6]बुने
ख़ुद काँटॊं की बाढ़ से गुज़री तेरी राहों में फूल चुने

ऐ दिल जिसने तेरी महरूमी [7]के दाग़ को धोया था
आज उसकी आँखें पुरनम[8]थीं और तू सोच में खोया थ
देख पराए दुख की ख़ातिर[9]तू भी कभी यूँ रोया था?

शब्दार्थ
  1. स्वार्थी
  2. व्याकुल
  3. कोलाहल
  4. जागता हुआ
  5. दुर्लभ,अप्राप्य
  6. स्वप्न
  7. निराशा,वंचितता
  8. भीगी हुईं
  9. के लिए,कारण