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ख़ुश्क़ धरती की दरारों ने किया याद अगर / लाल चंद प्रार्थी 'चाँद' कुल्लुवी

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ख़ुश्क़ धरती की दरारों ने किया याद अगर
उनकी आशाओं का बादल हूँ बरस जाऊँगा
कौन समझेगा कि फिर शोर में तन्हाई के
अपनी आवाज़ भी सुनने को तरस जाऊँगा