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ख़्वाब / फ़राज़

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ख़्वाब[1]

वो चाँद जो मेरा हमसफ़र[2]था
दूरी के उजाड़ जंगलों में
अब मेरी नज़र से छुप चुका है

इक उम्र से मैं मलूलो-तन्हा[3]
ज़ुल्मात[4] की रहगुज़ार[5] में हूँ
मैं आगे बढ़ूँ कि लौट जाऊँ
क्या सोच के इन्तज़ार[6] में हूँ
कोई भी नहीं जो यह बताए
मैं कौन हूँ किस दयार[7] में हूँ
 

शब्दार्थ
  1. स्वप्न
  2. सह-यात्री
  3. दुखित और अकेला
  4. अँधेरों
  5. रास्ते
  6. प्रतीक्षा
  7. दुनिया