भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

खिंच आता है / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अंधेरा हो भी तो
टिक नहीं सकेगा
न रह सकेगा
रंग बदलकर ही

दिप-दिप करती लौ का-सा
उजास जो है
तुम्हारे अंग-अंग में

यह कौंध ही तो
रास्ता दिखाती है
फिर उधर ही खिंच आता है
मन-पतगा मेरा !