भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

खिलें रंग अनेक / अरविन्द पासवान

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैं
मैं ही रहा

तुम-तुम

वह
वह ही रहें

हम-हम

आओ
रहने का फ़ासला रहने दें यहीं
हो जाएँ मिलकर एक
खिले रंग अनेक