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खूब बनी तेरी अँखिया, हाँ रे बने आज की रतिया / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

खूब बनी तेरी अँखिया, हाँ रे बने आज की रतिया।
खूब बना तेरा सेहरा[1] हाँ रे बने आज की रतिया।
लरिया[2] लगाएँ सब सखियाँ, हाँ रे बने आज की रतिया॥1॥
खूब बनी तेरी अँखिया, लाल बने आज की रतिया।
खूब सजा तेरा जोड़ा[3] हाँ रे बने आज की रतिया।
सनदल[4] लगाएँ सब सखियाँ, हाँ रे बने आज की रतिया॥2॥
खूब बनी तेरी अँखियाँ, हाँ रे बने आज की रतिया।
खूब सजा तेरा बीड़ा[5] हाँ रे बने आज की रतिया।
सुरखी[6] लगाएँ सब सखियाँ, लाल बने आज की रतिया॥3॥
खूब बनी तेरी लाड़ो, हाँ रे बने आज की रतिया।
घूँघट लगाएँ सब सखियाँ, लाल बने आज की रतिया।
खूब बनी तेरी अँखियाँ, हाँ रे बने आज की रतिया॥4॥

शब्दार्थ
  1. फूलों या गोटे आदि की लड़ियाँ, जो दुलहे और दुलहन के सिर पर बाँधी जाती है और मुँह पर लटकती रहती हैं; वह गाना, जो सेहरा बाँधने के समय गाया जाता है
  2. लड़ियाँ, एक सीध में गुँथी, लगी हुई किसी चीज की माला
  3. दुलहे को पहनाया जाने वाला कपड़ा, जिसका नीचे का भाग घाँघरेदार और ऊपर की काट बगलबंदी-सी होती है
  4. चंदन
  5. पान की गिलौरी
  6. लाली