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गजानन वर्मा / परिचय

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नाम  :गजानन वर्मा(नोखवाल)
जन्म : रतनगढ़(राजस्थान) 23 मई 1926 !
शिक्षा : रतनगढ़ और आगरा में !

  • सन् 1945-46 में ग्रामोत्तथान विद्यापीठ संगरिया मंडी शिक्षक और पुस्तकाल्याधयक्ष के पद पर स्वामी केशवानंद जी के संरक्षण में कार्य !
  • सन् 1947-48 में "जनपद" साप्ताहिक,कोलकाता के संयुक्त संपादक-पद पर कार्य किया !
  • सन् 1950-53 तक बलभारती,बीकानेर तथा रामपुरिया विद्यानिकेतन,गंगाशहर(बीकानेर) में शिक्षक के रूप में कार्य किया व बाल- रंगमंच के संस्थापक रहे!
  • सन् 1953-54 में प्रगतिशील द्वेमासिक पत्रिका "नई चेतना" बीकानेर के संपादकों में से एक! सलाहकार मंडल में-सर्व श्री राहुल सान्क्र्त्यान,भगवतशरण उपाध्याय व शिवदान सिंह चौहान!
  • राजस्थान कला केंद्र,बीकानेर(राजस्थान इप्टा)के संस्थापक सचिव रहे एवम् अखिल भारतीय प्रदर्शनों में बीकानेर राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया!
  • सन् 1954 वर्ष में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी के रतनगढ़ आगमन पर उनके सम्मान में काव्य-पाठ!श्री वर्मा का गीत"चाह यह मेरी अकिंचन" तत्कालीन मासिक पत्र"विशाल भारत"(कोलकाता) तथा राजेंद्र अभिनंदन ग्रंथ में प्रकाशित!
  • 12 अप्रेल 1959 में पुतलीघर(कठपुतली)नाट्य संस्थान,नई दिल्ली के संस्थापकों व संचालकों में से एक!पुतलीघर नाट्य संस्थान का उधघाटन IFACS ऑडिटोरियम नई दिल्ली के मंच पर पं. जवाहर लाल नेहरू जी ने किया!अमर सिंह राठोड़ कठपुतली नाटक के लेखक! अमर सिंह कठपुतली नाटिका के लिए उदयपुर में हुई अखिल भारतीय प्रतिस्पर्धा में पुतलीघर की नाटिका को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ! केंद्र के तत्कालीन मंत्री प्रो. हुमायू कबीर के हाथों पुरस्कार प्राप्त!
  • सन् 1957-58 में जामिया मिलिया ओखला(नई दिल्ली)के रिसर्च ट्रेनिंग एंड प्रोडक्शन सेंटर के सर्वेक्षक पद पर कार्य किया!
  • सन् 1958 में सुप्रसीध संगीत निर्देशक श्री सलिलचौधरी के साथ कार्य किया! "बंबई यूथ कोयर"में राजस्थानी गीत विभाग के सयोजक रहे!सहयोगी थे स्व. मुकेश,शंकर शेलेंद्र व सुगायक किशोर कुमार की पूर्व पत्नी रूमा गांगुली!
  • दी ग्रामोफ़ोन कंपनी(H.M.V.) के सुगायक! गजानन वर्मा की आवाज़ में कई ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड्स व केसेट्स निकल चुके हँ! राजस्थानी लोकशैली के लोकगीतों एवम् निजी गीतों के प्रख्यात गायक व संगीतकार!
  • अखिल भारतीय स्तर के वरिष्ठ कवि-गीतकार,सुगायक तथा नृत्यानाटककार!
  • बंगला और असमिया फिल्मों के हिन्दी व राजस्थानी गीतकार अभिनेता! फिल्मों के नाम"जात्री" "लॉटी-घोटी" तथा"चिकमिक बिजुली"!निर्देशक डॉ. भूपेन हज़ारिका!
  • "मेरा धर्म मेरी माँ" तथा "चमेली मेमसाब" हिन्दी फिल्मों के लोकप्रिय गीतकार, जिसके

   संगीतकार थे दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता डॉ. भूपेन हज़ारीक़ा!

  • प्रयोगात्मक राजस्थानी लघु फिल्म"हल्दी को रंग सुरंग"के लेखक,निर्देशक,निर्माता तथा संगीत निर्देशक!
  • आकाशवाणी तथा दूरदर्शन केंद्रों के लोकप्रिय गीतकार-कवि!
  • राजस्थान साहित्य तथा संगीत नाटक अकादमीयों के भूतपूर्व सदस्य तथा कार्यकारिणी सदस्य!
  • राष्ट्रीय कला मंडल,जोधपुर के भूतपूर्व कार्यवाहक सचिव!
  • अनेकानेक साहित्य,संगीत एवम् सामाजिक संस्थाओं से सम्मानित,विशेषतः राजस्थानी विकास मंच(राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार विश्वविद्यालय) जालोर से प्रदत राजस्थानी साहित्य के"डॉक्टर" की मानद उपाधि से विभूषित!
  • "रिमझिम",ऋतुरंग(मुंबई),संस्कृति संगम,राजस्थान कला केंद्र,कोलकाता संस्थाओं के भूतपूर्व सचिव!
  • "बनडो-बनडी."राजस्थानी वीडीयो-फिल्म के संगीत निर्देशक तथा "सपनो और कुरजा"वीडीयो- फिल्म के गीतकार एवं संगीत-निर्देशक!
  • "बारहमासा" "चौमासा" "घुघरा का बोल" "मीराबाई" "सुहागरात" "सत्तर ख़ान बहत्तर उमराव" आदि न्र्त्य-नाटकों के लेखक-निर्देशक एवम् संगीत-निर्देशक!27 मई 1968 को मीराबाई नाटक का मंचन तो श्रीराम भारतीय कला केंद्र,नई दिल्ली की संस्था ने भी किया!विश्व हिन्दीसम्मेलन के लिये नागपुर में "मीराबाई" का प्रदर्शन हुआ!
  • राजस्थानी लोक-संगीत के छेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये केंद्रीय(राष्ट्रीय) संगीत नाटक अकादमी,नई दिल्ली का राष्ट्रीय पुरस्कार(अकादमी अवॉर्ड)महामहिम उपराष्ट्रपति श्री कृष्णकांत जी के कर कमलों द्वारा दिनांक 12 मई 2001 को नई दिल्ली के अशोका होटल में प्राप्त!
  • "मीरा" गीति नाटक बीनानी न्यास मुंबई के लिये श्रीमती पदमा बीनानी द्वारा निर्मित ऑडीयो केसेट के आलेखक,सन्दर्भ गीतकार,स्वर-बंधक,निर्देशक एवम् संगीत निर्देशक! इस ऑडीयो केसेटका विमोचन 28 सितंबर 2001 मुंबई जुहू स्थित हरे रामा हरे कृष्णा ऑडिटोरियम में

  सिने तारिका हेमामालिनी द्वारा किया गया! अध्यक्ष थे पद्‌म श्री पुरुषोत्तम दास जलोटा,मुख्य अतिथि थे दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड प्राप्त एवम् पद्‌म भूषण डॉ. भूपेन हज़ारिका एवम् विशिष्‍ट अतिथि थीं लोकप्रिय फिल्म निर्देशिका सुश्री कल्पना लाज़मी!

  • गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के लाल किले में होते रहे अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में धूम मचाने वाले लोकप्रिय कवि गीतकार!

कवि गजानन वर्मा