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ग़ैब होगा सुराग़ भी होगा / रवि सिन्हा

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ग़ैब[1] होगा सुराग़ भी होगा
दिल भी होगा दिमाग़ भी होगा

हुक्मे-आसेब[2] के अँधेरे में
कोई ज़िद्दी चिराग़ भी होगा

देखना जीतकर वो आये हैं
उनके दामन पे दाग़ भी होगा

जल गया दिल कुरेद कर देखो
तिश्नगी[3] है फ़राग़[4] भी होगा

ख़ुल्दे[5]-ग़ालिब तो ख़ल्क़े[6]-फ़ैज़ो-फ़िराक़
मीर ख़ुसरो का बाग़ भी होगा

क़त्ल के बाद आँख तर होगी
हाथ ख़ाली अयाग़[7] भी होगा

ज़ौक़[8] अपना सँभाल कर रखिये
संग बुलबुल के ज़ाग़[9] भी होगा

शब्दार्थ
  1. रहस्य, आस्मान (mystery, cosmos)
  2. प्रेत या शैतान का आदेश (order of the demon)
  3. प्यास, अभिलाषा (thirst, desire)
  4. संतोष (freedom from care and worries)
  5. स्वर्ग (paradise)
  6. लोग, सृष्टि (people, creation)
  7. प्याला, चषक (wine glass)
  8. रसास्वाद, मज़ा (taste)
  9. कौआ (crow)