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गाँधी-जवाहर / नाथ कवि

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रावण नीति तजी जबही,
प्रगटे रघुबीर भक्त भय हारी।
कंस ने नीति तजी जबही,
मथुरा प्रगटे प्रभु कृष्ण मुरारी॥
दुर्योध्न जब नीति तजी,
भयौ अरजुन वीर बड़ौ धनु-धारी।
अब अंगरेजन नीति जी,
भये गाँधी जवाहर दोऊ अवतारी॥