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गीत 10 / तेसरोॅ अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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बस हमरा में चित रोपी कै सब टा कर्म करोॅ तों
सब टा कर्म करौ अर्पित तों श्रेय न माथ धरोॅ तों।

आशा ममता सन्तापोॅ के
त्यागि समर तों ठानोॅ,
दोष रहित अरु श्रद्धायुक्त भेॅ
कहल हमर तों मानोॅ
सकल कर्म के बन्धन कटतोॅ, कुछ नै सोंच करोॅ तों।
बस हमरा में चित रोपी केॅ सब टा कर्म करोॅ तों।

जे हमरा में दोष रोपि
हमरोॅ नै कहल करै छै,
से सूकर-कूकर योनी में
बरबस मूढ़ परै छै
हमरोॅ मत के समझि सुगम पथ, अपनोॅ चरण धरोॅ तों।
बस हमरा में चित रोपी केॅ सब टा कर्म करोॅ तों।

सब टा प्राणी निज स्वभाव के
बस सब कर्म करै छै,
ज्ञानवन्त भी अपन प्रवृत्ति
जैसन आचरण करै छै
सब कुछ हमर करल छिक अर्जुन अपनोॅ हठ न धरोॅ तों।
बस हमरा में चित रोपी केॅ सब टा कर्म करोॅ तों।