भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गीत 16 / ग्यारहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

केशव जगत निवास चतुर्भुज विष्णु रूप दिखलावोॅ
हे देवेश प्रसन्न हुओॅ सब भय के भूत भगावोॅ।

जे स्वरूप सुनलौं न देखलौं
से स्वरूप दिखलैलेॅ,
केशव अचरज रूप दिखावी
मन के हर्षित कैलेॅ,
जे स्वरूप बैकुण्ठ निवासै, से प्रभु दरस करावोॅ।

वैसें सिर पर मुकुट
हाथ में गदा चक्र के धैने,
शंख कमल से युक्त नारायण
दिव्य रूप निरमैने,
हे सहस्रबाहो प्रकटोॅ अब सहज कृपा बरसावोॅ।

श्री भगवान उवाच-

बोलल श्री भगवान कि
हमरोॅ परम अनुग्रह पैलै,
जेकरोॅ प्रकट प्रभाव पावि
विराट के दर्शन पैलेॅ,
हय स्वरूप के दर्शन दोसर नै पैलक पतियावोॅ
हे अर्जुन तों बड़भागी छेॅ पुनि-पुनि नैन जुरावोॅ।