भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गीत 1 / सतरहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अर्जुन उवाच-

श्रद्धावन्त जब शास्त्र विधि पूजन के त्याग करै छै
सात्विक राजस या तामस, एकरा गुण कोन कहै छै?
एकरा हम अज्ञान कहौं
या अवहेलना बतावौं,
हे केशव एकरा की कहि केॅ
अपना के समझावौं,
त्याग समर्पण साथ-साथ दोनों कैसें निमहै छै
सात्विक राजस या तामस, एकरा गुण कोन कहै छै?

श्री भगवान उवाच-

कहलन केशव, ऐसन मानव
तीनों गुण धारी छै,
शास्त्र विधि अरु भाव पक्ष में
भाव पक्ष भारी छै,
पूर्वजन्म के संस्कार से भाव पक्ष उपजै छै
श्रद्धावन्त तब शास्त्र विधि पूजन के त्याग करै छै।

सब प्राणी के श्रद्धा
ओकर अन्तः अनुरूप हुऐ छै,
सात्विक-राजस-तामस गुण
कर्मो अनुरूप हुऐ छै,
कर्मो से स्वभाव बनै, ओहने आचरण करै छै
श्रद्धावन्त तब शास्त्र विधि पूजन के त्याग करै छै।