भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गीत 1 / सोलहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

श्री भगवान उवाच-

कहलन श्री भगवान पुरुष के शुभ लक्षण तों जानोॅ।
के दैवी सम्पदा युक्त छिक, उनका तों पहचानोॅ।

जिनका कोनों भय नै कुछ के
जिनकोॅ हिय निर्मल छै,
तत्त्व ज्ञान के जे पैने छै
ध्यान योग धारै छै,
हमरा में दृढ़ रहै निरन्तर, से हमरोॅ छिक मानोॅ
कहलन श्री भगवान पुरुष के शुभ लक्षण तों जानोॅ।

करै सात्विक दान,
इन्द्रिय के जे दमन करै छै,
देव-पितर-भगवान-गुरु के
सादर जे पूजै छै,
अग्नि-होत्र जे कर्म करै, उत्तम आचरण बखानोॅ
के दैवी सम्पदा युक्त छिक, उनका तों पहचानोॅ।

वेद-शास्त्र के करै परायण
हमरोॅ नाम तपै छै,
करै हमर नित कीर्तन-गायन
शुभ आचरण गहै छै
धरम हेतु जे कष्ट सहै छै, परम सुधर्मी मानोॅ
कहलन श्री भगवान पुरुष के शुभ लक्षण तों जानोॅ।

इन्द्रिय सहित सरल अन्तः जे
उनका नै कुछ बाधा,
राग-द्वेष-भय-शोक न व्यापै
हिय के सीधा-साधा,
करै काम निष्काम भाव से, उनका योगी मानोॅ
के दैवी सम्पदा युक्त छिक, उनका तों पहचानोॅ।