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गीत 3 / तेरहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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अर्जुन, अब तों क्षेत्र के जानोॅ
इच्छा-द्वेष और दुख-सुख, हय देह से उपजल मानोॅ।

सब जन सुख के करै कामना, दुख के चहै दुरावेॅ
इच्छा अन्तः के विकार छिक, जे सहजें न नसावेॅ
दुख-सुख बीच विरोध-बुद्धि से उगल द्वेष पहचानोॅ
अर्जुन, अब तों क्षेत्र के जानोॅ।

घृणा-वैर-क्रोध-ईर्ष्या के, समझोॅ दुख के कारण
हय चारो के त्याग, करै प्राणी के दुख्ख निवारण
धारण करि संकल्प, मोन से दुख के जैड़ उकानोॅ
अर्जुन, अब तों क्षेत्र के जानोॅ।

अन्तः के रोॅ ज्ञान-शक्ति, दुख-सुख के महसूसै छै
हय अन्तः के वृत्ति, चेतना जेकरा लोग कहै छै
सुख के रोपोॅ पौध, हृदय से दुख के पौध उकानोॅ
अर्जुन, अब तों क्षेत्र के जानोॅ।