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गीत 6 / पहिलोॅ अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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अर्जुन उवाच-

केशव! अब हम युद्ध लड़ब नै
अपनोॅ परिजन के अपने से हम संहार करब नै।

नै हमरा चाही जय या जस, नै सत्ता, नै सेना
नै हमरा सुख भोग झुठौका, कुछ केकरो से लेना
अपने परिजन के विरुद्ध केशव! गाण्डीव धरब नै
केशव! अब हम युऋ लड़ब नै।

जिनका लेली लोग राज वैभव के चाह करै छै
गुरु चाचा बेटा दमाद लै लोग उछाह करै छै
ससुर सार मामा अरु पोता सब के प्राण हरब नै
केशव! अब हम युद्ध करब नै।

केवल धरती के नै, तीनों लोकोॅ के सुख त्यागब
हम निज कुल के नाश करी, नै चैन से सूतब-जागब
वंशघात के दोष कृष्ण, हम अपनौ माथ धरब नै
केशव! अब हम युद्ध करब नै।