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गुम कर दिया इन्साँ को यहाँ लाके किसी ने / सीमाब अकबराबादी

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गुम कर दिया इन्साँ को यहाँ लाके किसी ने।
समझे ही नहीं शोब्दे दुनिया के किसी ने॥

जब जोशे-तमन्ना को न रुकते हुए देखा।
आग़ोश में ले ही लिया घबरा के किसी ने॥