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घायल परिंदों की इतनी-सी कहानी देखो / सांवर दइया

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घायल परिंदों की इतनी-सी कहानी देखो।
उनपे हुई थी मौसम की मेहरबानी देखो।

सबको खुश करने का जादू लेकर निकले आज,
अब गली-गली हो रहे दौरे तूफानी देखो!

ऐसी हरक़तों से हंसा रहे ज़माने को आज,
हंसी की जगह आ रहा आंखों से पानी देखो!

सामने खड़े होने वाले देख रहे अंधेरे,
जमहूरी-सल्तनत की नयी कहानी देखो!

भोर के सभी सपने क्यों हो रहे हलाल यहां,
सवाल पूछ लिया हमने, हुई नादानी देखो!