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घेरी-घेरी आबै मदमस्त बदरिया राम / भुवनेश्वर सिंह भुवन

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घेरी-घेरी आबै मदमस्त बदरिया राम!
पुलकित नीलम, बिहँसै बदरिया,
जैसनॅ घूँघट ओट बहुरिया,
सिहरि-सिहरि काँपै नम-आँचल
पवन परस-रस छलकै गगरिया राम!

रस-सिंचित धरती हरियाबै,
बीज-बीज अंकुर अकुलाबै,
बन्द आँख, डोलै नव-कलिका,
रूप गंध मधु बरसै डगरिया राम!

दूध घोलॅ छिटकै चाँदनियाँ,
सगर रात रोपै रोपनियाँ,
गाबै गीत, रात शरमाबै,
घर नहिं आबै बलम परदेशिया राम!