भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चाँदमारी / दिनेश कुमार शुक्ल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आज दिन भर सूरज
तकली पर धागों सी
किरनें काता किया

हवा
अपने तरकश के
पुरवाये-पछुवाये
तीर
फेंकती रही

आदमी के सीने-सी
एक दीवार ने
खूब लोहा पिया
खूब सीसा पिया

आज
यहाँ जम करके
चाँदमारी हुई