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चाँद, औरत और रोटी / विवेक चतुर्वेदी

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आज रात
चाँद के पीछे भागता
एक छोटा सा तारा
नहीं है शुक्र
झूलाघर से मचल कर भागा
बच्चा है
कामकाजी औरत है
चाँद
जिसे दफ्तर पहुँचना है
दफ्तर खेत है
औरत जहाँ दो रोटी
उगाती है।