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चुहिया को बुखार / बालकृष्ण गर्ग

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सपने में जब देखी बिल्ली,
हुई रात को तबीयत ढिल्ली।
चुहिया को आ गया बुखार,
पूरा डिगरी एक-सौ-चार।
सुबह गई डाक्टर के पास,
जो थे चूहे ‘चूँ-चूँ दास’।
डाक्टर ने तब नब्ज टटोली,
तीन खिलाई कड़वी गोली-
और लगाई एक सुई,
चुहिया करती- ‘ऊई-ऊई’।

[रचना : 22 जून 1998]