भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चेहरों की चोरी करता है / शीन काफ़ निज़ाम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चेहरों की चोरी करता है
आईना आसेबज़दा है

जाने क्या उस ने सोचा है
फिर पत्थर के पास खड़ा है

शहर हमारा कुछ मत पूछो
आवाज़ों का इक सहरा है

आवाज़ों के जंगल में भी
सन्नाटा ही सन्नाटा है

दोनों तरफ़ कुहसार खड़े हैं
बीच में इक दरिया बहता है

आहट है तेरे क़दमों की
या कोई पत्ता खड़का है