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छत्तीसगढ़ के पुतरा / तिरथ राम गढ़ेवाल

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चल रे मोर छत्तीसगढ़ के पुतरा तय चल।
कावर लजाथस तंय ह, इतरा के चल॥

सबके वनगे ठउर ठांव अउ
सबके बसे बसेरा

तोरो दुवारी हांसत आही
कुलवत दिया दसेरा।

तोर हंसइया तोला निहारंय, विजरा के चल।

वलदाऊ के करम भूमि ए
राम-श्याम के धरम धाम,

चल तोर रे सबरी के वेट।
ऊंचा का माटी के नाव।

चल वाघनीनी के पीलवा, सोरा-सतरा वन चल।


नइ हस कोनो ले कमती वाबू
नइ हस अबूझअजान

बल वइंहा वजरंगी हे तोर
बुध के अवल सूजान।

कलं-वल ल मिंझरा के संगे, सभरा के चल।

करम के कुरता परन के पागा
किरिया के कुदरा ल धर

लड़ा दे लोहा-जांगर जोधा
सोने-सोन म कोठी भर ।

बोझा वोहे पहार, छाती पखरा के चल
चल रे मोर छत्तीसगढ़ के पुतरा तंय चल॥