भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

छम घुँगरू बाजला / शिवानन्द नौटियाल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

छम घुँगरू बाजला,
छम छमाछम घुँगरू बाजला
छ घुंगरू बाजला, मांडा की उकाली[1] मा
भली नथुली[2] साजली तडतडी[3]-सी नाक मा,
तू फूल मा फूल छई, बाँद[4] छई लाखों मा,
मैं मायादार[5] तेरो, सरानी रखलो हाथ मा।

शब्दार्थ
  1. चढ़ाई
  2. नथ
  3. सुन्दर, पैनी
  4. सुन्दरी
  5. प्रेमी